मनुष्य जीवन संतोष रूपी धन कमाने को मिला है : आचार्य संजीव रूप
महर्षि दयानंद सरस्वती का जन्मदिन भी मनाया गया
बिल्सी ::तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी गांव में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया । इस अवसर पर यज्ञ तथा सत्संग किया गया।आर्य समाज के संस्थापक महान समाज सुधारक महर्षि दयानंद का जन्मोत्सव भी हर्षोल्लाह के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने महर्षि दयानंद को याद करते हुए कहा “देश में शिक्षा के साथ-साथ पाखंड का बढ़ना चिंता का विषय है !शिक्षा और विद्या का उद्देश्य होता है चरित्र का निर्माण करना, वैज्ञानिक उन्नति करते हुए
शारीरिक सामाजिक व आत्मिक उन्नति करना तथा समाज में फैली हुई अंधविश्वास आदि की परंपराओं को दूर करना ! कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि लोग आज भी भूत प्रेत जिन्न पिशाच छुआछूत जातिवाद बाल विवाह दहेज प्रथा पर्दा प्रथा तथा अनेक पाखंडों में फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा महर्षि दयानंद का संदेश था हमें वह धन भी कमाना चाहिए।जिससे हम संतोष कहते हैं और यह तब प्राप्त होता है
जब हम ईमानदार सच्चरित्र परोपकारी दानी तथा सेवाभावी होते हैं। मास्टर साहब सिंह ने कहा “महर्षि दयानंद यदि ना आते तो हम आज भी गुलाम होते और पाखंडों में फंसे होते ! कुमारी तृप्ति शास्त्री कुमारी ईशा आर्य,
कुमारी मोना रानी ने वेदपाठ किया ! राकेश आर्य,सुखबीर सिंह श्रीमती संतोष कुमारी गुड्डू देवी, श्रीमती अंजली आर्य , कुमारी सोनवती, श्रीमती उषारानी,श्रीमती सरोज देवीआदि मौजूद रहे।