एआरटीओ कार्यालय के बाहर ऑनलाइन कार्य की दुकानों और मिडिलमेन द्वारा दलाली लेने के आरोप हमेशा सामने आते रहते हैं, और आए दिन कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा कार्यवाही की जाती हैं,
लेकिन कार्यवाही की नाम पर शॉप को सील कर सख्त कार्यवाही करने का दिखावा किया जाता है, जिसके चलते कार्यालय के बाबू से लेकर प्राइवेट कर्मचारियों पर कोई आंच नहीं आती है
और कार्यवाही के कुछ दिनों बाद फिर से कार्यालय में आने वाले लोगों का आर्थिक और मानसिक शोषण शुरू हो जाता है, और हमेशा की तरह ऑनलाइन करने वाले दुकानदारों का प्रशासन द्वारा शोषण किया जाता है और उन्हें मिडिलमैन और दलाल बताया जाता है।
कैसे होता कार्यालय में भ्रष्टाचार का खेल
अधिकतर परिवहन विभाग कार्यालय में बाबू अपने अधीन प्राइवेट स्थानीय लोगों को लगा लेते हैं, जो काम के एवज में मोटा रुपया वसूल कर बाबू को देते हैं जिसका हिस्सा अधिकारियों और बाबू से लेकर सभी लोगों में बांटा जाता है। बदायूं कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर वाहन ट्रांसफर करने हेतु प्रत्येक कार्य पर एक निश्चित धनराशि तय रहती है,
जैसे लोकल बाइक ट्रांसफर पर 500 रुपए, लोकल कार ट्रांसफर पर 1 हजार रुपए, वाहन अन्य जिले से noc लेकर आए तो बाइक पर 1000 और कार पर 1900 रुपए, यही धनराशि दूसरे जनपद को वाहन की noc ले जाने पर भी तय है। यदि दूसरे राज्य से से वाहन noc लेकर आए तो बाइक पर सौ रुपए nr के और इंस्पेक्शन के 400 रुपए, 2 सौ रुपए सत्यापन लेटर, 1 हजार रुपए ऑर्डर और 2 सौ रुपए ta और 2 सौ रुपए rc के नाम पर कुल 2100 रुपए प्राइवेट कर्मचारियों द्वारा दुकानदारों से वसूल किए जाते हैं ,
वहीं कार के ट्रांसफर पर सौ रुपए nr के और इंस्पेक्शन के 700 रुपए, 2 सौ रुपए सत्यापन लेटर, 3 हजार रुपए ऑर्डर, 2 सौ रुपए ta और 2 सौ रुपए rc के कुल 4400 रुपए कार्यालय के बाबू को जाता है।
वहीं कार्यालय में यदि आवेदक डायरेक्ट जाता है तो बाबू और प्राइवेट कर्मचारियों द्वारा उन्हें काफी भागदौड़ कराई जाती है जिससे परेशान होकर वह किसी शॉप पर या मिडिलमैन के पास पहुंचकर उनके जरिए काम कराए और उन तक यह तय धनराशि पहुंच सके।
बात बदायूं जिले के कार्यालय की करी जाए तो यहां सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं जिसके जरिए कार्यालय में काम करने वाले प्राइवेट कर्मचारियों को वहां पर काम करते देखे जा सकता है और अगर प्रशासन द्वारा इस पर कार्यवाही की जाए तो भ्रष्टाचार पर लगाम लग सकती है।
ऑनलाइन आवेदन के लिए फीस से अतिरिक्त 100 से 200 रुपए लेने वाले दुकानदारों की आड़ में कार्यालय के अधिकारी और बाबू मोटी दलाली कर रहे हैं और उनके बजाए दुकानदारों को मिडिलमैन कहा जाना कहां तक ठीक है, और दलाल से परिभाषित करना क्या उचित है? आगे भी इससे जुड़ी खबर जैसे नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस समेत तमाम कार्यों पर रिश्वत के खेल से जुड़ी खबर जल्द ही प्रकाशित की जाएगी।