पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन ‘उत्तम मार्दव’ की आराधना
बहजोई: श्री दिगंबर जैन मंदिर बहजोई में चल रहे पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन मंगलवार को ‘उत्तम मार्दव धर्म’ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। प्रातःकालीन कार्यक्रम में श्री जी का प्रथम अभिषेक और शांतिधारा करने का शुभ सौभाग्य श्री दिगंबर जैन सभा के अध्यक्ष सुनील कुमार जैन को सपरिवार प्राप्त हुआ। इसके पश्चात नित्य पूजन एवं दसलक्षण विधान का आयोजन हुआ, जो विद्वान चंद्र कुमार जैन ‘
शास्त्री’ मंडावरा (मध्य प्रदेश) के निर्देशन में सम्पन्न हुए। इस अवसर पर ‘उत्तम मार्दव’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए शास्त्री जी ने कहा कि “मार्दव का अर्थ है सरलता और विनम्रता। यह अहंकार को त्यागकर आत्मा को शुद्ध बनाने का साधन है। जिस व्यक्ति के जीवन में मार्दव धर्म होता है,
वह सदैव सहज, सरल और समाज में सबके प्रति सम्मानभाव रखने वाला होता है। अहंकार ही आत्मा की बंधन जंजीर है और मार्दव उसका नाश करने वाला उत्तम गुण है।” उन्होंने आगे कहा कि जीवन में विनम्रता अपनाने से पारस्परिक संबंध मजबूत होते हैं और समाज में शांति एवं सौहार्द का वातावरण निर्मित होता है।
सांयकालीन कार्यक्रम में सामूहिक आरती, णमोकार महामंत्र पाठ, प्रवचन एवं प्रश्नमंच का आयोजन हुआ। इसके साथ ही रात्रि में आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिता “कितने भाई कितने प्रभु ने बताए जितने” आकर्षण का केंद्र रही।
प्रतियोगिता का आयोजन आकांक्षा जैन द्वारा कराया गया। इस प्रतियोगिता में स्वाति सौरभ जैन, स्वाति प्रफुल्ल जैन एवं प्राची जैन ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। सभी कार्यक्रमों का संचालन श्री दिगंबर जैन सभा बहजोई के महामंत्री सम्भव जैन ने किया।