11 हजार की लाइन ने झुलसाए सपने... डीएम ने पोंछे आंसू, 50 हजार की मदद और नौकरी का मरहम

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11 हजार की लाइन ने झुलसाए सपने... डीएम ने पोंछे आंसू, 50 हजार की मदद और नौकरी का मरहम

Tuesday, February 17, 2026 | February 17, 2026 Last Updated 2026-02-17T14:03:11Z
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11 हजार की लाइन ने झुलसाए सपने... डीएम ने पोंछे आंसू, 50 हजार की मदद और नौकरी का मरहम

रामपुर। घर की छत, जो बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित खेल का मैदान मानी जाती है, वही कमोरा गांव की शिवानी के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गई। 11 केवी की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर झुलसी इस बेटी के जख्मों पर अब प्रशासन ने मरहम लगाने की कोशिश की है। जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने न केवल पीड़ित परिवार को 50 हजार रुपये की

 आर्थिक सहायता सौंपी, बल्कि शिवानी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उसे गांव में ही रोजगार दिलाने की भी संवेदनशील पहल की है।

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सद्दाम उस्मानी एडवोकेट ने कहा डीएम साहब के इस सराहनीय कार्य के लिए हम शुक्रगुजार हैं। पीड़ित की आर्थिक स्थिति कमजोर ब गरीब है। 
*दर्द लेकर पहुंचा था पिता, सुनी गई पुकार*

मामला मिलक तहसील के ग्राम कमोरा का है। बीते 2 जनवरी 2026 को जनता दर्शन में शिवानी के पिता निर्मल सिंह अपनी लाचारी और बेटी का दर्द लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंचे थे। उन्होंने बताया था कि कैसे हंसती-खेलती शिवानी नौ वर्ष पहले छत पर खेलते वक्त 11 हजार वोल्ट के करंट की चपेट में आ गई थी। उस हादसे ने न सिर्फ बेटी को शारीरिक रूप से तोड़ा, बल्कि परिवार को भी आर्थिक संकट में डाल दिया था।

*बिजली विभाग ने जुटाई मदद, डीएम ने दिया सहारा*

पिता की पीड़ा को समझते हुए डीएम श्री अजय कुमार द्विवेदी ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता श्री सत्येन्द्र चौहान को तलब कर मदद के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में आज कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम ने शिवानी को बिजली विभाग द्वारा संकलित 50,000 रुपये का चेक सौंपा। यह राशि भले ही शिवानी के शारीरिक कष्ट को कम न कर सके, लेकिन इलाज और जरूरतों के लिए एक बड़ा सहारा जरूर बनेगी।

*सिर्फ मदद नहीं, भविष्य की भी चिंता*

हादसे के बाद शिवानी का जीवन कैसे चलेगा, डीएम ने इसकी भी चिंता की। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने जिला पंचायतराज अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि शिवानी को उसकी ग्राम पंचायत में ही दैनिक कार्यों के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए। प्रशासन की इस पहल से अब पीड़ित परिवार को एक दीर्घकालिक आसरा मिल सकेगा।
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