जैविक खेती से बढ़ा लाभ, महिलाओं की भागीदारी भी हुई मजबूत

Notification

×

All labels

All Category

All labels

जैविक खेती से बढ़ा लाभ, महिलाओं की भागीदारी भी हुई मजबूत

Friday, May 15, 2026 | May 15, 2026 Last Updated 2026-05-15T14:34:35Z
    Share
जैविक खेती से बढ़ा लाभ, महिलाओं की भागीदारी भी हुई मजबूत

बदायूं 15 मई। नमामि गंगे जैविक खेती परियोजना के अंतर्गत चयनित कृषकों द्वारा जैविक खेती को अपनाकर खेती की लागत कम करने, मृदा की गुणवत्ता सुधारने तथा किसानों की आय में वृद्धि करने की दिशा में सराहनीय कार्य किया जा रहा है। परियोजना से जुड़े ग्राम सिकन्दराबाद निवासी कृषक वीर प्रताप सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया 


कि उन्होंने 0.4 हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती हेतु पंजीकृत कराया है और प्रथम वर्ष में रबी सीजन के दौरान गेहूं की फसल से जैविक खेती की शुरुआत की।
वीर प्रताप सिंह ने बताया कि फसल की बुवाई से पूर्व उन्होंने भूमि का शोधन किया तथा अपने घर के बीज को बीजामृत से उपचारित किया।

 उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर 50 किलो प्रोम खाद को 2 कुंतल वर्मी कम्पोस्ट के साथ मिलाकर खेत में प्रयोग किया, जिससे फसल को पर्याप्त फास्फोरस प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त बुवाई के लगभग 28 से 30 दिन बाद सिंचाई के दौरान जीवामृत का प्रयोग किया गया। 

फसल को रोग एवं कीटों से सुरक्षित रखने के लिए हर्बल कीटनाशकों का तीन बार छिड़काव किया गया, जिसके कारण फसल पर किसी प्रकार का रोग या कीट प्रकोप नहीं हुआ।
उन्होंने बताया कि जैविक खेती में उत्पादन रासायनिक खेती की अपेक्षा लगभग 20 से 25 प्रतिशत कम रहा, 

लेकिन फसल लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आने से लाभांश में 5 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई। साथ ही भूमि में सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ने से भविष्य में उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में और अधिक सुधार होने की संभावना है।

परियोजना के अंतर्गत चयनित समूहों के कृषकों को नियमित रूप से जैविक खेती के विभिन्न आदानों को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें गाय आधारित तरल जैव खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद तथा राइजोबियम, पीएसबी कल्चर, जिंक सॉल्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया, पोटाश मोबिलाइजिंग बैक्टीरिया एवं जिप्सम जैसे जैविक उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी जा रही है।

 पोषक तत्व प्रबंधन के साथ-साथ जैविक कीटनाशकों के प्रयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
कृषि विविधीकरण परियोजना यूपीडास्प के माध्यम से समूह के सदस्यों को प्रथम वर्ष में 12 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर, द्वितीय वर्ष में 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तथा तृतीय वर्ष में


 9 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता अनुदान डीबीटी के माध्यम से सीधे कृषकों के खातों में हस्तांतरित किया जा रहा है। इसके अलावा ट्राइकोग्रामा कार्ड, ब्यूवेरिया बेसियाना, गौमूत्र, नीम तेल तथा ब्रम्हास्त्र जैसे जैविक कीटनाशकों का प्रयोग फसल उत्पादन को सुरक्षित एवं संतुलित बनाए रखने हेतु कराया जा रहा है।
परियोजना के अंतर्गत पीजीएस मानकों के अनुसार जैविक प्रमाणन प्रक्रिया का भी कड़ाई से पालन कराया जा रहा है।

 जैविक खेती को अपनाने से किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ महिला कृषकों की भागीदारी भी बढ़ी है। अतिरिक्त आय से उनके रहन-सहन में सुधार देखने को मिला है तथा गांव की अन्य महिलाएं भी इससे प्रेरित होकर जैविक खेती की ओर आकर्षित हो रही हैं। महिलाएं समूह की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाकर परियोजना की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
CLOSE ADS
CLOSE ADS
close