प्रभारी प्रधानाध्यापक नियुक्ति और ट्रांसफर प्रक्रिया में बड़े खेल का आरोप, CDO से निष्पक्ष जांच की मांग।
बदायूं। जनपद बदायूं में तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) वीरेंद्र सिंह के कार्यकाल के दौरान प्रभारी प्रधानाध्यापक पद पर की गई नियुक्तियों और बड़े पैमाने पर हुए शिक्षकों के तबादलों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शासन और न्यायालय के आदेशों को ताक पर रखकर नियमों के विपरीत सैकड़ों शिक्षकों के एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में स्थानांतरण करने का आरोप लगाते हुए मुख्य विकास अधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
शिकायत पत्र के अनुसार, न्यायालय और शासन के आदेशों में स्पष्ट उल्लेख है कि किसी भी विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद रिक्त होने पर उसी विद्यालय के वरिष्ठतम सहायक अध्यापक को प्रभारी बनाया जाएगा। वरिष्ठ शिक्षक के असहमत होने पर ही उससे कनिष्ठ (जूनियर) को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। शासनादेश में कहीं भी यह
प्रावधान नहीं है कि किसी अन्य विद्यालय के शिक्षक को लाकर प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाया जाए। इसके विपरीत, तत्कालीन BSA द्वारा भारी संख्या में शिक्षकों का ट्रांसफर एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में कर दिया गया।
मुख्य सचिव महोदय के 14 अक्टूबर 2025 के आदेश की बिंदु संख्या 6 का हवाला देते हुए बताया गया
कि जनपद के सहायक अध्यापकों की वरिष्ठता सूची जारी की जानी थी। लेकिन बदायूं जनपद में न तो ग्रामीण क्षेत्र और न ही नगर क्षेत्र की कोई वरिष्ठता सूची जारी की गई और न ही इसे कहीं प्रकाशित किया गया। बिना किसी पारदर्शी सूची के ही चहेतों को मनचाही जगह तैनात कर दिया गया।
आरोप है कि इन नियुक्तियों और तबादलों में न तो वरिष्ठता का ध्यान रखा गया और न ही छात्र-शिक्षक अनुपात का। इस प्रक्रिया के कारण जनपद के कई विद्यालय एकल' (सिंगल टीचर) या पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। वर्तमान एकल विद्यालयों की सूची से जांच कराई जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि वहां से शिक्षकों को हटाकर दूसरी जगह प्रभारी बना दिया गया, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शिकायतकर्ता ने मुख्य विकास अधिकारी से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की बिंदुवार निष्पक्ष जांच कराई जाए। नियमों के विरुद्ध की गई इस संपूर्ण प्रभारी प्रधानाध्यापक प्रक्रिया और स्थानांतरणों को तत्काल निरस्त कर नए सिरे से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। साथ ही, शासनादेशों का उल्लंघन कर राजस्व और व्यवस्था को चोट पहुंचाने वाले तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों व दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।