रक्षाबंधन पर सुजावली में भाई-बहन के रिश्ते के नाम रोपा पौधा, वन विभाग ने दिया हरियाली बचाने का संदेश

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रक्षाबंधन पर सुजावली में भाई-बहन के रिश्ते के नाम रोपा पौधा, वन विभाग ने दिया हरियाली बचाने का संदेश

Friday, August 28, 2026 | August 28, 2026 Last Updated 2026-08-28T15:40:09Z
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🌳 रक्षाबंधन पर सुजावली में भाई-बहन के रिश्ते के नाम रोपा पौधा, वन विभाग ने दिया हरियाली बचाने का संदेश

संवाददाता काशिफ अली खान की रिपोर्ट सहसवान

“एक पेड़ भाई-बहन के नाम” अभियान के तहत प्राथमिक विद्यालय सुजावली में हुआ पौधारोपण

सहसवान (बदायूं) 28 अगस्त 2026।
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सामाजिक वानिकी वन प्रभाग, सहसवान रेंज, बदायूं की ओर से प्राथमिक विद्यालय सुजावली में भावनाओं और पर्यावरण को जोड़ने वाली अनूठी पहल की गई। “भाई-बहन पौधारोपण रक्षाबंधन वाटिका—एक पेड़ भाई-बहन के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण कर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों की टीम मौजूद रही। कर्मचारियों ने विद्यालय परिसर में पौधा रोपते हुए बच्चों को समझाया कि रक्षाबंधन सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प लेने का पर्व है। इसी भावना को प्रकृति से जोड़ते हुए पेड़ लगाना और उसकी रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है। राखी की डोर के साथ धरती की रक्षा का संकल्प

इस अभियान का सबसे खास संदेश यह रहा कि जिस तरह भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है, उसी तरह हर व्यक्ति को एक पौधे की रक्षा का भी संकल्प लेना चाहिए। आज लगाया गया छोटा सा पौधा आने वाले वर्षों में विशाल वृक्ष बनकर न केवल छाया देगा, बल्कि शुद्ध हवा और हरियाली के रूप में आने वाली पीढ़ियों को जीवन का उपहार देगा।

वन विभाग के कर्मचारियों ने बच्चों को पौधों की नियमित देखभाल, पानी देने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय में मौजूद लोगों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को पेड़ से जोड़ना अपने आप में बेहद खूबसूरत और यादगार संदेश है। आज पौधा, कल भाई-बहन के प्रेम की निशानी
सुजावली विद्यालय में लगाया गया 

यह पौधा आने वाले समय में केवल एक वृक्ष नहीं रहेगा, बल्कि रक्षाबंधन 2026 की याद और भाई-बहन के प्रेम की जीवंत निशानी बनेगा। इसकी छांव में आने वाली पीढ़ियां खड़ी होंगी और शायद उन्हें यह भी याद रहेगा कि कभी रक्षाबंधन के दिन इसी जगह किसी ने धरती की कलाई पर हरियाली की राखी बांधी थी।
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