₹30.06 लाख के साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा, विदेशी ऑपरेटरों से लेकर म्यूल अकाउंट और USDT नेटवर्क तक फैला था जाल।

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₹30.06 लाख के साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा, विदेशी ऑपरेटरों से लेकर म्यूल अकाउंट और USDT नेटवर्क तक फैला था जाल।

Saturday, September 5, 2026 | September 05, 2026 Last Updated 2026-09-05T08:35:51Z
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₹30.06 लाख के साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा, विदेशी ऑपरेटरों से लेकर म्यूल अकाउंट और USDT नेटवर्क तक फैला था जाल। 

दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की वेस्टर्न रेंज-II टीम ने ₹30.06 लाख की साइबर ठगी के मामले में एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह किसी एक स्थानीय समूह तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार कथित तौर पर विदेशी/चीनी डिजिटल ऑपरेटरों, टेलीग्राम ऑपरेटरों, भारतीय बिचौलियों, म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वालों और क्रिप्टोकरेंसी हैंडलर्स तक जुड़े हुए थे।

इस मामले में पुलिस ने उदित त्यागी (26), निवासी मेरठ, उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार किया है। वह इस नेटवर्क में म्यूल बैंक खातों की निगरानी और वित्तीय लेन-देन के समन्वय से जुड़ा प्रमुख आरोपी बताया गया है। पुलिस के मुताबिक उदित मामले में वांछित था और उसके खिलाफ LOC जारी थी। वह जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा, जहां ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने उसे हिरासत में लिया। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने जयपुर एयरपोर्ट थाना पुलिस से उसकी कस्टडी लेकर उसे इस मामले में गिरफ्तार किया।

व्हाट्सऐप से शुरू होता था ठगी का खेल

पुलिस के अनुसार पीड़ित गौरव रुस्तोगी को व्हाट्सऐप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल और फर्जी ऑनलाइन निवेश/ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आकर्षक कमाई और निवेश का लालच दिया गया। शुरुआत में पीड़ित से छोटी रकम निवेश कराई गई। फर्जी प्लेटफॉर्म पर मुनाफा और रिवार्ड दिखाकर उसका भरोसा जीता गया और कुछ मामलों में छोटी रकम निकालने की अनुमति भी दी गई।

भरोसा बनने के बाद पीड़ित को लगातार बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। जब पीड़ित ने अपना पैसा निकालने की कोशिश की तो उसे VIP Membership, Account Upgrade, Repair Task, Reputation Enhancement, Withdrawal Charges, Tax Clearance और System Maintenance जैसे अलग-अलग बहानों से अतिरिक्त रकम जमा करने को कहा गया।

हर बार रकम को अंतिम भुगतान बताया गया, लेकिन भुगतान करने के बाद एक नई मांग सामने आ जाती थी। इस तरह पीड़ित से लगातार पैसे जमा करवाकर करीब ₹30.06 लाख की ठगी की गई।

टेलीग्राम पर चलता था पूरा नेटवर्क

जांच में सामने आया कि शुरुआती संपर्क के बाद पीड़ितों को टेलीग्राम पर ले जाया जाता था। यहां आरोपी खुद को वित्तीय सलाहकार, निवेश विशेषज्ञ, कस्टमर केयर प्रतिनिधि या टास्क मैनेजर के रूप में पेश करते थे।

पुलिस को ऐसे टेलीग्राम समूह भी मिले, जिनमें कथित विदेशी/चीनी ऑपरेटर शामिल थे। इन समूहों में वित्तीय लेन-देन और USDT-INR कन्वर्जन रेट तक साझा किए जाते थे। यानी टेलीग्राम का इस्तेमाल केवल पीड़ितों से बातचीत के लिए नहीं बल्कि विदेशी ऑपरेटरों और भारतीय नेटवर्क के बीच समन्वय और पैसों के सेटलमेंट के लिए भी किया जा रहा था।

18 से ज्यादा म्यूल बैंक खाते मिले

ठगी की रकम को सीधे एक खाते में रखने के बजाय कई भारतीय बैंक खातों में भेजा जाता था। जांच में 18 से अधिक फर्स्ट-लेयर म्यूल बैंक खाते सामने आए हैं। इसके बाद रकम को कई अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाता और ATM, चेक तथा बैंक ट्रांसफर के माध्यम से निकाला जाता था।

जांच में पीड़ित द्वारा ट्रांसफर किए गए ₹5 लाख की रकम एक Federal Bank खाते में पहुंचने का पता चला। यह खाता आरोपी मोनिश के नाम पर था, लेकिन इंटरनेट बैंकिंग IP लॉग के विश्लेषण से पुलिस ने दावा किया कि खाते का संचालन आरोपी अक्षत सिरोही और अनिश द्वारा किया जा रहा था।

USDT के जरिए विदेश तक पहुंचता था पैसा

जांच में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम को इधर-उधर करने का एक समानांतर नेटवर्क भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक टेलीग्राम समूहों के जरिए भारतीय बिचौलिये विदेशी ऑपरेटरों के साथ USDT और भारतीय रुपये में लेन-देन का सेटलमेंट करते थे।

कुछ लेन-देन में करीब 5,000 से 10,000 USDT तक विदेशी ऑपरेटरों को उपलब्ध कराया गया और इसके बदले भारतीय खातों के माध्यम से रुपये की रूटिंग की गई। बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों को कथित तौर पर करीब 10 से 15 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था।

तकनीकी जांच से खुली साइबर ठगी की पूरी चेन

क्राइम ब्रांच की तकनीकी टीम ने व्हाट्सऐप बिजनेस रिकॉर्ड, टेलीग्राम कम्युनिकेशन, CDR, CAF, IPDR, इंटरनेट बैंकिंग IP लॉग, KYC दस्तावेज, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल फोन और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण किया।

जांच में Google, WhatsApp, बैंकों और टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स से प्राप्त जानकारी को भी डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के साथ जोड़ा गया। पुलिस के अनुसार इसी तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण के जरिए विदेशी डिजिटल ऑपरेटरों, टेलीग्राम ऑपरेटरों, भारतीय म्यूल अकाउंट हैंडलर्स, क्रिप्टो ऑपरेटरों और अन्य आरोपियों के बीच संबंधों को मैप किया गया।

35 से ज्यादा साइबर शिकायतों से लिंक की जांच

प्रारंभिक जांच में NCRP डेटा और आरोपी से जुड़े लाभार्थी बैंक खातों का विश्लेषण करने पर इन खातों के संबंध 35 से अधिक साइबर क्राइम शिकायतों से सामने आए हैं। ये शिकायतें अलग-अलग राज्यों में दर्ज कराई गई थीं। पुलिस अब इन शिकायतों में ठगी गई रकम और बैंक खातों के बीच पूरी कड़ी की पुष्टि कर रही है।

कौन आरोपी क्या करता था?

अनिश (22 वर्ष): पुलिस के अनुसार अनिश बाजार स्तर पर बैंक खाते उपलब्ध कराने और उन्हें नेटवर्क के लिए इस्तेमाल कराने में शामिल था। वह ग्रेजुएशन कर रहा है और कॉन्ट्रैक्टर/इंटीरियर डिजाइनर के रूप में काम करता है। उसके खिलाफ हरियाणा के साइबर थाना मानेसर में भी मामला दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

अक्षत सिरोही (22 वर्ष), मुरादनगर, यूपी: आरोपी पर नेटवर्क के क्रिप्टोकरेंसी/USDT हिस्से को संभालने का आरोप है। पुलिस के अनुसार वह Binance खातों के जरिए क्रिप्टो लेन-देन और रकम की स्विचिंग में शामिल था। वह ग्रेजुएशन कर रहा है और वाटर सप्लाई कॉन्ट्रैक्टर के रूप में काम करता है।

उदित त्यागी (26 वर्ष), मेरठ: पुलिस ने उसे नेटवर्क का प्रमुख हैंडलर और म्यूल बैंक खातों की निगरानी से जुड़ा आरोपी बताया है। पुलिस के अनुसार मामले में नाम सामने आने के बाद वह पहले थाईलैंड, मलेशिया और बाद में UAE चला गया था। उसके पास से एक मोबाइल फोन और म्यूल अकाउंट से संबंधित चेकबुक बरामद की गई है।

हाकम अली (25 वर्ष), बीकानेर, राजस्थान: पुलिस के मुताबिक उसने WhatsApp Group “HO30” बनाया और संचालित किया, जिसके जरिए लोगों को कथित फर्जी निवेश योजना में शामिल किया जाता था।

मोनिश (22 वर्ष), हापुड़: पुलिस के अनुसार उसने अपना Federal Bank खाता कमीशन के लालच में नेटवर्क को इस्तेमाल करने दिया। इसी खाते में पीड़ित की ₹5 लाख की रकम पहुंची थी।

वहीं पुलिस ने AK को इस नेटवर्क का मुख्य भारतीय समन्वयक और प्रमुख संदिग्ध बताया है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस के मुताबिक वह बैंक खातों की व्यवस्था और ठगी की रकम के संचालन से जुड़े लोगों के साथ समन्वय करता था।

आरोपी का राजकोट साइबर फ्रॉड से भी लिंक

पुलिस जांच में उदित त्यागी का नाम गुजरात के राजकोट में दर्ज एक अन्य साइबर फ्रॉड मामले में भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार FIR नंबर 11208057260033/2026 में करीब ₹8.16 लाख की ऑनलाइन वित्तीय ठगी की जांच चल रही है।

जांच के दौरान एक कथित फर्जी Firebase URL सामने आया, जिसका तकनीकी और अकाउंट-स्तरीय संबंध उदित से जुड़े ईमेल अकाउंट के साथ स्थापित होने की बात पुलिस ने कही है। हालांकि इस मामले में उदित की सटीक भूमिका और उसकी संलिप्तता की सीमा अभी जांच का विषय है।

सात मोबाइल फोन समेत डिजिटल सबूत बरामद

क्राइम ब्रांच ने जांच के दौरान सात मोबाइल फोन, SIM कार्ड, Federal Bank की पासबुक और चेकबुक, उदित त्यागी का मोबाइल फोन, बैंकिंग रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और WhatsApp Group डेटा बरामद किया है।

जब्त मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इससे अतिरिक्त टेलीग्राम ग्रुप, फर्जी ऐप और वेबसाइट, क्रिप्टो वॉलेट, विदेशी संपर्क तथा नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

विदेशी ऑपरेटरों तक पहुंचने की कोशिश

क्राइम ब्रांच अब इस पूरे नेटवर्क के विदेशी/चीनी ऑपरेटरों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने वालों की पहचान करने में जुटी है। इसके अलावा नए म्यूल अकाउंट धारकों, टेलीग्राम ऑपरेटरों, क्रिप्टोकरेंसी हैंडलर्स और अन्य बिचौलियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि पूरी मनी ट्रेल, USDT लेन-देन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और विदेशी संपर्कों की जांच जारी है तथा फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

दिल्ली पुलिस की नागरिकों से अपील

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को WhatsApp और Telegram पर आने वाले ऑनलाइन निवेश, ट्रेडिंग और टास्क-बेस्ड कमाई के ऑफरों से सावधान रहने की सलाह दी है। पुलिस ने कहा है कि फर्जी प्लेटफॉर्म पर दिखाए जा रहे मुनाफे, स्क्रीनशॉट और सफलता की कहानियों के झांसे में न आएं।

किसी निवेश या ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता जांचे बिना पैसा जमा न करें और अनजान बैंक खातों में रकम ट्रांसफर न करें। OTP, बैंकिंग पासवर्ड और अन्य संवेदनशील वित्तीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

साइबर ठगी होने पर नागरिकों को तुरंत 1930 पर शिकायत करने या National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।

दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सामने ला दिया है कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली साइबर ठगी केवल फोन या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके पीछे बैंक खातों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए संचालित एक संगठित नेटवर्क काम कर सकता है
संवाददाता यूपी हेड कौशल पाराशरी की रिपोर्ट 
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