*सहसवान में PM स्वनिधि योजना सवालों के घेरे में, तीन बैंकों पर पक्षपात का आरोप, सिविल के नाम पर लौटाए जा रहे आवेदक*
*सहसवान (बदायूं)।* केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी *प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना* का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी और छोटे दुकानदारों को बिना गारंटी के सस्ता लोन देकर आत्मनिर्भर बनाना है। लेकिन जनपद बदायूं के सहसवान नगर में इस योजना की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां तीन प्रमुख बैंकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
*सिविल के नाम पर खेल*
स्थानीय आवेदकों का आरोप है कि सहसवान स्थित *स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया* की शाखाओं में योजना के पात्र लाभार्थियों को चक्कर कटवाए जा रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाला मामला *शाहबाजपुर स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा* का है, जहां आवेदकों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि *"आपकी सिविल सही नहीं है, इसलिए आपकी फाइल नहीं होगी।"*
जबकि हकीकत यह है कि *PM स्वनिधि योजना के दिशा-निर्देशों में सिविल स्कोर की कोई बाध्यता नहीं है।* यह योजना विशेष रूप से गरीब, जरूरतमंद और डिफॉल्टर तक हो चुके छोटे व्यापारियों के लिए ही बनाई गई है ताकि उन्हें दोबारा रोजगार शुरू करने का मौका मिल सके। फिर सिविल के नाम पर लोन रोकना सीधे तौर पर योजना के नियमों की अनदेखी है।
*पक्षपात और अनियमितता के आरोप*
पीड़ित दुकानदारों का कहना है कि बैंकों में कुछ खास लोगों की फाइलें तुरंत पास हो जाती हैं, जबकि आम पात्र व्यक्ति महीनों तक बैंक के चक्कर काटते रहते हैं। लोगों ने ऋण वितरण में कथित पक्षपात और अनियमितताओं की आशंका जताई है।
*बड़ा सवाल*
सवाल यह उठता है कि जब योजना गरीबों के लिए है तो -
1. पात्र लाभार्थियों को लाभ क्यों नहीं मिल रहा?
2. क्या सभी आवेदनों पर समान नियम लागू हो रहे हैं?
3. जब सिविल का कोई मतलब ही नहीं है तो आवेदकों को सिविल के नाम पर क्यों भगा दिया जाता है आवेदकों का कहना है कि वह अपनी जरूरत पूरी करने के लिए आवेदन किया था लेकिन बैंकों खुली मनमानी की जा रही है
संवाददाता राजेश गुप्ता ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट बदायूं