मिलक दरगाह भैंसोडी शरीफ से संबंधित विवादित वायरल वीडियो का अधूरा सच प्रकाश में आया
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हमारा मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है-- सूफी जावेद हुसैन शाह
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देश में भाईचारा एवं हिंदू मुस्लिम एकता का पैगाम हमारा कर्तव्य है--सूफी जावेद हुसैन शाह
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सूफी सिलसिले की विश्व प्रसिद्ध दरगाह है मुर्शीद नगर भैसौडीं शरीफ
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पीरो मुर्शीद के इश्क में झूमना हाल-का़ल व रक़्स कहलाता है---हज़रत जावेद हुसैन शाह
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संवाददाता - शब्बन मियां आज़र उवैसी
मिलक तहसील मिलक मुर्शीद नगर भैंसोड़ी शरीफ में उर्से लियाकती से संबंधित एक विवादित वायरल वीडियो का अधूरा सच आज प्रकाश में आया।
ज्ञात हो कि अभी हाल फिलहाल में विश्व प्रसिद्ध दरगाह मुर्शीद नगर भैंसोड़ी शरीफ में उर्से लियाकती संपन्न हुआ था।
जिसमें परंपरागत एवं विधिवत रूप से सरकारी चादर दरगाह के मुतावल्ली एवं सज्जादा नशीन हज़रत जावेद हुसैन शाह के निवास स्थान से दरगाह पर प्रस्तुत की जाती है। इसी दौरान कव्वाली का प्रोग्राम भी होता है।
इस मौके पर हज़रत सूफी जावेद हुसैन शाह के हजारों अनुयायी एवं श्रद्धालु इस प्रोग्राम में हिस्सा लेते हैं। पूर्व की भांति इस बार भी सरकारी चादर की रस्म अदायगी पर कव्वालियों के प्रोग्राम में जैसे ही साहिबे सज्जादा नशीन जावेद हुसैन शाह अपने निवास स्थान से बाहर आते हैं।
उनके अनुयायी एवं श्रद्धालु उनको एक समूह में घेर लेते हैं, और पीरो मुर्शीद के इश्क में झूमने लगते हैं । और उन पर नोटों की बरसात जारी कर देते हैं। और इसी बीच भूल वश सज्जादा नशीन जावेद हुसैन
शाह श्रद्धालुओं एवं अनुयायियों के समूह में घिरे होने के कारण जमीन पर पड़े नोटों पर अपने कदम रख देते हैं। और यह वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है। जिसे भारतीय मुद्रा का अपमान जताते हुए कुछ संगठन कार्यवाही की मांग करने लगते हैं।
मामला संज्ञान में आने पर जनपद रामपुर पुलिस अधीक्षक द्वारा भी जांच के आदेश पारित किए गए हैं। जिसके संबंध में आज दरगाह व खानकाह हसनी, अजीजी, लियाकती , के सज्जादा नशीन व मुतावल्ली धर्मगुरु हज़रत जावेद हुसैन शाह के द्वारा विवादित वायरल वीडियो के अधूरे सच पर प्रकाश डालते हुए खेद प्रकट करते हुए कहा
कि मुर्शीद नगर भैंसोड़ी शरीफ से संबंधित सूफी सिलसिला भाईचारा एवं हिंदू मुस्लिम एकता और सौहार्द को समर्पित है। अपने जारी बयान में उन्होंने कहा कि हमारा मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। किंतु फिर भी यदि हमारे द्वारा किसी की भावनाएं आहत हैं तो इसके लिए हमें खेद है।
खानकाह से जारी एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर सूफी सिलसिले के धर्मगुरु हज़रत जावेद हुसैन शाह ने बताया कि पीरो मुर्शीद के इश्क में झूमना हाल-का़ल व रक़्स कहलाता है।
हाल-का़ल व रक़्स कदापि नाचने की श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने कहा कि सूफी सिलसिला अमन चैन एकता और भाईचारे का प्रतीक है, खानकाह व दरगाह हसनी, अजीजी़, लियाकती, हिंदू मुस्लिम सौहार्द व एकता और अखंडता को समर्पित मरकज है।