लीगल सर्विस यूनिट फॉर चिल्ड्रन को दिया गया प्रशिक्षण

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लीगल सर्विस यूनिट फॉर चिल्ड्रन को दिया गया प्रशिक्षण

Monday, November 25, 2024 | November 25, 2024 Last Updated 2024-11-25T13:13:01Z
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लीगल सर्विस यूनिट फॉर चिल्ड्रन को दिया गया प्रशिक्षण
बदायूँ 25 नवम्बर। माननीय उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुक्रम में माननीय उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूं के निर्देशानुपालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूं के तत्वाधान में दिनांक 25.11.2024 को प्रातः 09ः00 बजे से जनपद न्यायालय परिसर में स्थित केन्द्रीय सभागार,
 बदायूं में लीगल सर्विस यूनिट फॉर चिल्ड्रन (एलएसयूसी) के अन्तर्गत गठित कमेटी को विभिन्न सरकारी संस्थाओं व गैर सरकारी संस्थाओं के रिसोर्स पर्सन द्वारा प्रशिक्षण दिया गया।
       प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रारम्भ में कारापाल, जिला कारागार, बदायूं, श्री कुंवर रणंजय सिंह, द्वारा अपने वक्तव्य जिला कारागार में निरूद्ध ऐसे महिला बन्दी जो गर्भवती होती हैं और शिशु के गर्भकाल से जन्म लेने तक उनके उचित पालन-पोषण के लिए
जेल मुख्यालय लखनऊ एवं जिला प्रशासन द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुरूप पालन किया जाता है तथा महिला बैरक में महिला बन्दियों के साथ रह रहे बच्चों के अधिकारों व जेल नियामावली के वारे में विस्तार पूर्वक बताया।
सदस्य, किशोर न्याय बोर्ड, बदायंू, श्री अरविन्द गुप्ता, द्वारा अपने वक्तव्य में बताया कि किसी भी किशोर अपराधी को किसी अपराध के तहत अधिकतम 03 वर्ष से अधिक की सजा नहीं दी गयी है,
अपितु ऐसे मामलों सामन्य दंड यथा पौधारोपण व सामाजिक कार्य में लगा दिया जाता है इसके अतिरिक्त किशोर न्याय बोर्ड में संचालित गतिविधिओं के वारे में विस्तार पूर्वक बताया, बाल संरक्षण अधिकारी, श्री रवि कुमार, द्वारा अपने वक्तव्य में बताया कि बाल श्रम कानून के अन्तर्गत कोई भी बच्चा 14 वर्ष से कम की आयु में किसी कारखाना, संगठन में कार्य करता है तो वह बाल श्रम के अपराध में संलिप्त है,

इस ग्राफ को जागरूकता फैला कर कम किया जा सकता है व चाल्ड हेल्प लाइन न0-1098 पर सूचना दें जिससे सार्वजनिक स्थानों पर लापता बच्चों को बाल गृह शिशु में भेज सकते हैं तथा सरकार द्वारा चलायी जा रही बचों के अधिकारों से सम्बन्धित विभिन्न प्र्रकार की योजनाओं के वारे में भी विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की गयी।

       मनोचिकित्सक, जिला पुरूष अस्पताल, बदायूं, डा0 सर्वेश कुमारी, द्वारा अपने वक्तव्य में लीगल सर्विस यूनिट फॉर चिल्ड्रन (एलएसयूसी) से सम्बन्धित प्रोजेक्टर के माध्यम से शार्ट/लघु चलचित्र के द्वारा बच्चों के मानसिक परिस्थियों विषयों पर विस्तार पूर्वक जागरूक किया गया, सचिव, काशी समाज शिक्षण संस्थान, बदायूं, श्रीमती मीना सिंह, द्वारा अपने वक्तव्य में बाल विवाह मुक्त भारत के अन्तर्गत सभी जनसामान्य से अपील की जाती है

कि अपने बच्चों की कम उम्र में शादी न करें, व बाल विवाह की रोकथाम से सम्बन्धित विस्तार पूर्वक बताया, इसी क्रम में उक्त कार्यक्रम की संचालनकर्ता, सुश्री कशिश सक्सेना, द्वारा अपने वक्तव्य में संविधान में वर्णित अनुच्छेद-14, समानता का अधिकार, अनुच्छेद-39ए, अनुच्छेद-21 व विधिक सेवा अधिनिमय-1987 आदि के वारे में विस्तार पूर्वक बताया गया।
       लीगल सर्विस यूनिट फॉर चिल्ड्रन (एलएसयूसी) प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,

बदायूं, श्रीमती शिव कुमारी द्वारा उक्त कार्यक्रम के परिप्रेक्ष्य में मिली-जुली प्रतिक्रियायें एवं उपस्थित सभी प्रशिक्षक/रिसोर्स पर्सनों का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूं, श्री मनोज कुमार-तृतीय द्वारा किया गया।

इस अवसर पर श्रीमान अध्यक्ष, न्यायालय स्थायी लोक अदालत, बदायूं, अपर जनपद न्यायाधीश/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूं, कारापाल, जिला कारागार, बदायूं डिप्टी चीफ, एल0ए0डी0सी0, बदायूं, सम्मानित नामिका अधिवक्तागण, पराविधिक स्वयंसेवकगण, आदि उपस्थित आये।
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