और तहेरी बहन के घायल होने के मामले में मृतक बच्चों के पिता ने बोलेरो कार चालक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है। इधर, मृत बच्चों के घर मंगलवार को भी शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा।
बता दें कि सोमवार को जरीफनगर थाना क्षेत्र के गांव फिरोजाबाद नरौटा मजरा कांकसी निवासी प्रेमपाल की पुत्री अंशू (12), पुत्र अंकित (11) गांव नगला चोई स्थित एक निजी विद्यालय में कक्षा एक और दो में पढ़ते थे। सूत्रों से पता लगा कि इस विद्यालय की मानता ही नहीं है जबकि खंड शिक्षा अधिकारी अपने गांव में अवैध संचालित स्कूल को बचाते हुए हाई स्कूल तक मान्यता के स्कूल पर ही आरोप लगा दिया कि बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते थे जबकि हकीकत यह है इन बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में था उन बच्चों को अपने निजी अवैध विद्यालय में बच्चों को पढ़ने के लिए मजबूर किया जिसकी मान्यता ही नहीं है सवाल उठता है जब खंड शिक्षा अधिकारी सहसवान को फोन किया जाता है तो वह फोन नहीं उठाते लोगों ने बताया इसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आपसी समझौता करके दूसरे स्कूल का नाम अपनी जांच में दे दिया कि बच्चे इस स्कूल में पढ़ते थे महीपाल की 12 वर्षीय पुत्री खुशबू भी उनके साथ इसी स्कूल में कक्षा दो में पढ़ती है। सोमवार सुबह करीब साढ़े सात बजे तीनों बच्चों को बदायूं मेरठ हाईवे पर गांव सिलहरी के पास अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। पुलिस ने तीनों बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। चिकित्सकों ने अंशू और अंकित को मृत घोषित कर दिया। खुशबू को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था।
देर शाम मृतक बच्चों के पिता प्रेमपाल ने पुलिस को शिकायती दिया। उनका कहना है कि बच्चे विद्यालय बंद होने के कारण वापस लौट रहे थे। तभी बोलेरो कार ने बच्चों को टक्कर मार दी। इससे दो बच्चों की मृत्यु हो गई और एक बालिका घायल हो गई। पुलिस ने शिकायती पत्र में दिए गए वाहन नंबर के आधार पर अज्ञात बोलेरो कार चालक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर चालक की तलाश शुरू कर दी है। दूसरे दिन भी मृत बच्चों के घर मातमी सन्नाटा पसरा रहा। उनके स्वजन बच्चों को याद कर आंसू बहा रहे थे। नाते रिश्तेदार और आसपास गांवों के लोग भी उनके घर शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंच रहे थे। कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक राजेन्द्र बहादुर सिंह ने बताया कि कार को कब्जे में ले लिया गया है। चालक की तलाश की जा रही है। अब शिक्षा विभाग पर भी तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं की शिक्षा विभाग अपनी मनमानी रिपोर्ट लगा देते हैं बरहाल शिक्षा विभाग पर उठ रहे सवालों का जवाब अधिकारी नहीं दे रहे जबकि देखा जाता है कि प्रत्येक सावन माह में शनिवार इतवार को अधिकांश प्राइवेट स्कूल खोले जाते हैं बच्चों का आवागमन रहता है और शिक्षा विभाग के अधिकारी अपनी आंखें बंद कर रहते हुए नजर आते हैं