पर्युषण महापर्व में ‘उत्तम त्याग’ की साधना
बहजोई: श्री दिगंबर जैन मंदिर बहजोई में चल रहे पर्युषण महापर्व में गुरुवार को ‘उत्तम त्याग धर्म’ की आराधना श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुई। प्रातःकालीन पूजन-अर्चन में शांतिधारा का शुभ सौभाग्य मोहित जैन एडवोकेट एवं अंशुल जैन आढ़ती को सपरिवार प्राप्त हुआ। जैन शास्त्री चंद्र कुमार ने प्रवचन में कहा कि “त्याग धर्म का वास्तविक अर्थ है
मोह और लोभ से दूर होकर आत्मा को शुद्ध करना। त्याग का भाव जीवन को सरल और शांत बनाता है। त्यागी व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में धर्ममय जीवन जी सकता है।” उन्होंने आगे कहा कि त्याग के बिना संयम और साधना अधूरी है, क्योंकि त्याग ही आत्मकल्याण का द्वार खोलता है। सांयकालीन बेला में बच्चों के लिए धर्म गतिविधि कार्यक्रम का आयोजन किया
गया, जिसमें सभी नन्हे-मुन्ने बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। इस आयोजन की भूमिका स्वाति सौरभ जैन द्वारा निभाई गई, जबकि बच्चों को शैली जैन एवं मितेश जैन द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात सामूहिक आरती एवं प्रवचन के पश्चात ‘शास्त्र सज्जा प्रतियोगिता
’ का आयोजन हुआ। प्रतियोगिता में प्रियल जैन एवं कविशा जैन ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। द्वितीय स्थान सजल जैन को और तृतीय स्थान जिज्ञासा जैन एवं छवि जैन को प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता का आयोजन श्री दिगंबर जैन सभा द्वारा कराया गया। संचालन महामंत्री सम्भव जैन ने किया।