बदायूं में आशा वर्कर्स का धरना 30वें दिन भी जारी, 19–20 जनवरी को होंगी जन अदालतें
संवाददाता प्रदीप पाल की रिपोर्ट बदायूं
बदायूँ।जन अदालतें आयोजित करेगी आशा वर्कर्स यूनियन जौली वैश्य
आशा कर्मियों की हड़ताल के 30 वें दिन भी पूरे प्रदेश की भांति बदायूं में भी हड़ताल और धरना भी मालवीय मैदान में जारी रहा। धरने के आज भी बड़ी संख्या में आशा कर्मियों ने हिस्सा लिया।
धरने में शामिल आशा कर्मियों को संबोधित करते हुए अध्यक्ष जौली वैश्य ने कहा कि प्रदेश की सरकार कितनी असंवेदनशील है , इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 29 दिन बाद भी सरकार स्वास्थ्य विभाग की उस सेना से बात नहीं करना चाहती, जिसे विश्व मंच पर ग्लोबल लीडर का खिताब दिया गया।
उन्होंने कहा कि आशा कर्मी पूरी दक्षता के साथ अपने कार्यों का 20 वर्षों से संपादन करती आई हैं। इनके अधिकांश आशा कर्मी अगले 5 वर्षों में सेवा से निवृत्त हो जाएगी किंतु कितना भयावह है कि 30 वर्ष रात दिन सेवाएं देने वाली आशा कर्मियों को उनकी सेवा निवृत्ति पर उनके बुढ़ापे भरे भविष्य के लिए कुछ नहीं होगा। न भविष्य निधि और न ग्रेड्यूटी। सेवा काल में सामाजिक सुरक्षा नहीं , पेट भर रोटी का भी पारिश्रमिक नहीं ,बच्चों की शिक्षा दीक्षा के लिए कुछ नहीं,
खुद की बीमारी पर इलाज नहीं, दुनिया में अकेली कामगार महिलाएं जिनको मातृत्व अवकाश नहीं, ऐसे बेगार करने वाले लोग अगर बोलने लगे तो सरकार को अच्छा नहीं लगा होगा।
यह आन्दोलन उसी भविष्य की असुरक्षा से जुड़ा हुआ है। सरकार को इन सवालों का हल और 20 वर्षों से जारी श्रम की लूटका हिसाब करना होगा।
जौली वैश्य ने घोषणा की कि आगामी 19 और 20 जनवरी को उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन पूरे प्रदेश में सरकार की इस दमनकारी नीतियों और आशा कर्मियों के शोषण के विरुद्ध जन अदालतें लगाएगी। बदायूं में भी तमाम सामाजिक और कर्मचारी संगठनों के साथ साथ आशा कर्मियों के परिजनों , ग्रामीण और शहरी निकायों के प्रतिनिधियों,
बुद्धिजीवियों , पत्रकारों लेखकों और जनता के विभिन्न तबकों सहित आशा कर्मियों के परिजनों ,शुभ चिंतकों , रिश्तेदारों सहित जिनकी सेवा के अपना कीमती 20 वर्ष लगाया उन ग्रामीण और शहरी नागरिकों को इन जन अदालतों में आमंत्रित किया जाएगा।
जिला सचिव मनीषा ने कहा कि सरकार इस आंदोलन को जितना दमित करेगी, उतना ही आंदोलन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हम आशा कर्मियों की ही 1.5 करोड़ की कमाई रकम लापता हो गई , साथ ही मातृत्व बंदना योजना का 4 वर्ष का पैसा पूरे प्रदेश की नव प्रसूता माताओं का भी बट्टे खाते में डाल दिया गया। जब आशाकर्मियों ने इस सवाल को उठाया तो यह कार्य आशा से लेकर आंगनवाड़ी बहनों को दे दिया गया।
जिला सचिव ने आगे कहा कि स्वास्थ्य केंद्र वसूली के अड्डे हो गए हैं, तागा धागा से लेकर दवाएं तक बाहर से खरीदने के बावजूद प्रसव से लेकर जन्म प्रमाण पत्र तक वसूली का शिकार लोगों को बनाया जा रहा है। समाज के सभी लोगों के स्वास्थ्य का सवाल इन केंद्रों से जुड़ा हुआ है और इन अस्पतालों का रास्ता आशा कर्मियों ने दिखाया है। 19 _20 को होने वाली जन अदालतों में ऐसे सभी लोगों को शामिल करना है।
सहसचिव मुनिशा ने कहा कि सरकार को जान लेना चाहिए कि अबकी बार निर्णय तक जाने के संकल्प के साथ यह आंदोलन शुरू है, और इसे किसी तिकड़म और भय ,दमन और उत्पीड़न से समाप्त नहीं कराया जा सकता। 30दिन से जारी आंदोलन ने यह साबित कर दिया है। इसलिए वार्ता के जरिए स्थिति को सामान्य करने की सरकार पहल करे ।इस मौके पर अलका , ज्योति , गौरा , राजेश्वरी , निधि , रामेश्वरी , मीरा , सीमा , प्रतिभा , सपना , अनीता , कुसुमलता , कुमुद , बसंती , दुर्गा आदि ने भी संबोधित किया।