सरकारी आदेशों की अनदेखी, जिम्मेदार कौन
पशु क्रूरता और प्रशासनिक उदासीनता का संगम
बगरैन। बदायूं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही बेसरा पशुओं के संरक्षण और उनके लिए बेहतर आश्रय स्थल सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दे रही हो, लेकिन कस्बा बगरैन में इन निर्देशों की धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही हैं।
जनवरी की इस भयंकर ठंड और जानलेवा कोहरे के बीच कस्बे में दर्जनों बेसहारा सांडों का झुंड खुले आसमान के नीचे रात काटने को मजबूर है। सरकार की प्राथमिकता में शामिल इन पशुओं के प्रति संबंधित कर्मचारी और ग्राम प्रधान जानबूझकर अनजान बने हुए हैं।
पिछले कई दिनों से जारी भीषण शीतलहर और घने कोहरे ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है।
जहां लोग घरों में दुबके हैं, वहीं कस्बे के मुख्य चौराहों,गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर बेसहारा सांडों के झुंड कांपते हुए नजर आ रहे हैं। रात के समय घना कोहरा होने के कारण सड़क पर खड़े ये सांड वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन सड़क हादसे होते रहते हैं। कड़ाके की ठंड के बीच इन पशुओं के लिए ना तो चारे की व्यवस्था है
और ना ही सिर छुपाने के लिए कोई तिरपाल या अस्थाई शेड ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एक भी बेसहारा गौवंश सड़क पर नहीं रहना चाहिए, और उनके लिए गौशालाओं में समुचित व्यवस्था, गुड़ चारे और अलाव का प्रबंध होना चाहिए। इसके बावजूद बगैरन कस्बे में स्थिति इसके ठीक उलट है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और ग्राम पंचायत की लापरवाही के कारण यह पशु आवारा घूम रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है
कि ग्राम प्रधान और संबंधित कर्मचारी सब कुछ अपनी आंखों से देख रहे हैं लेकिन कागजों पर खाना पूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। यदि इन पशुओं को जल्द गौशाला भिजवाया जाता, तो ना तो पशु ठंड से मरते और ना ही सड़क पर चलने वाले राहगीर घायल होते।
ठंड से बेहाल इन सांडों की दुर्दशा पशु क्रूरता का भी प्रत्यक्ष उदाहरण है। कस्बे के समाजसेवियों ने मांग की है
कि तत्काल पशु गणना कर इन्हें नजदीकी गौशालाओं में स्थानांतरित किया जाए।जब तक इन्हें शिफ्ट नहीं किया जाता,तब तक इनके लिए अलाव और चारे की व्यवस्था की जाए।