बदायूँ : 13 फरवरी। रेशम उद्योग तकनीकी प्रकृति का कार्य है जिसमें गरीब, मजदूर कृषक के साथ बडे-बड़े उद्यमी भी कार्यरत हैं। जलवायु एवं भौगोलिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश में रेशम उत्पादन एवं विकास की अपार संभावनायें हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने के उददेश्य से रेशम विभाग द्वारा एक नई सोच के साथ रणनीति तैयार कर कार्यवाही प्रारम्भ की गयी है।
प्रदेश सरकार ने केन्द्र एवं राज्य पोषित संचालित योजनाओं से लाभ प्राप्त करने वाले लाभार्थियों के लिये पारदर्शी सुविधा उपलब्ध कराने हेतु ष्रेशम मित्र पोर्टलष् तैयार कराकर ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा लागू कर दी है।
प्रदेश में मार्केटिंग मॉड्यूल के अन्तर्गत रेशम कोया उत्पादक व कृषकों को उचित मूल्य, समयबद्ध विक्रय एवं पारदर्शी भुगतान की व्यवस्था तैयार की जा रही है तथा ककून की गुणवत्ता के अनुसार न्यूनतम विक्रय मूल्य निर्धारण हेतु केन्द्रीय रेशम बोर्ड (भारत सरकार) के वैज्ञानिकों/
अधिकारियों के समन्वय से जनपद स्तर पर कमेटियों के गठन की कार्यवाही प्रारम्भ की गयी है। इसी तरह से राजकीय रेशम फर्मों की क्षमता के अनुसार प्रभावी बनाने एवं बेहतर प्रबंधन के लिए फार्म मैनेजमेन्ट मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है।
प्रदेश में उत्पादित ककून का रेशमी धागा उत्तर प्रदेश में ही तैयार हो सके तथा प्रदेश में ही खपत हो इसके लिए विभाग द्वारा रेशम धागाकरण कार्य के लिये मल्टीइण्ड रीलिंग इकाईयों की स्थापना की जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश में रेशम उद्योग के प्रचार-प्रसार तथा आम जनमानस में शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान तथा रेशम उत्पादन से सम्बन्धित सभी क्रियाकलापों से परिचित कराने के उद्देश्य
से रेशम निदेशालय स्तर पर केन्द्रीय रेशम बोर्ड (भारत सरकार) एवं राज्य सरकार के सहयोग से ष्सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्सष् स्थापित किये जाने की नई पहल की गयी है। इस केन्द्र में सोइल टू सिल्क प्रदर्शनी के साथ शुद्ध रेशमी वस्त्रों/परिधानों के विक्रय हेतु शोरूम भी उपलब्ध रहेगा। एन०जी०ओ०. एफ०पी०ओ० समितियां एवं स्वयं सहायता समूहों को रेशम उत्पादन से जोड़ने के प्रबल प्रयास किये जा रहें हैं।
प्रदेश के वन विभाग, पंचायती राज विभाग, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी विभाग एन०एच०ए०आई० ग्राम विकास विभाग के साथ एम०ओ०यू० कर रेशम कृषि को विस्तार प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग के अथक प्रयासों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश के पिछले 9 वर्षों में रेशम का निर्यात् रू० 9.11 करोड़ से बढ़कर रू0 251.65 करोड हो गया है। यह उल्लेखनीय है कि रेशम निर्यात में 28 गुना की वृद्धि अन्य सेक्टरों के मुकाबले सर्वाधिक है।
रेशम उद्योग कृषि पर आधारित कुटीर उद्योगों में अग्रणी स्थान रखता है। उत्तर प्रदेश की उर्वरा भूमि भौगोलिक स्थिति, जलवायु एवं जैव विविधता रेशम उद्योग हेतु सर्वथा अनुकूल एवं उपयुक्त है। प्रदेश में तीन प्रकार यथा शहतूती, टसर एवं अरण्डी का रेशम उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश में रेशम उद्योग की प्रबल सम्भावनाओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 1987 में एक अलग रेशम निदेशालय की स्थापना हुई। जो वर्ष 1988 से रेशम निदेशालय लखनऊ में कार्य प्रारम्भ किया गया।
प्रदेश में रेशम उद्योग के विकास हेतु 231 राजकीय रेशम फार्म स्थापित है। वर्तमान में प्रदेश का जितना रेशम उत्पादन है, उससे अधिक रेशम की खपत है। इसके दृष्टिगत प्रदेश में रेशम उत्पादन, धागाकरण, बुनाई डिजाइनिंग, निर्यात की अपार सम्भावनायें हैं।
उच्च गुणवत्ता युक्त रेशम उत्पादन के लिए रेशम उत्पादकों को सहयोग भी दिया जाता है। प्रदेश में मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना वर्ष 2025-26 से आरम्भ की गई है, जिसके अन्तर्गत कृषकों की निजी भूमि पर शहतूत वृक्षारोपण कर रेशम धांगे का अतिरिक्त उत्पादन किया जायेगा।
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