केबिनेट मंत्री ने 15 जनपदों में 30 नवनिर्मित वृहद गोसंरक्षण केन्द्रों का लोकार्पण किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी के दिशा-निर्देशन में राज्य सरकार निराश्रित एवं बेसहारा गोवंशों के संरक्षण, संवर्धन तथा उनके समुचित भरण-पोषण हेतु निरंतर कार्य कर रही है। वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना से न केवल गोवंशों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, बल्कि उनके लिए चारा, पानी, चिकित्सकीय सुविधाएं एवं स्वच्छ वातावरण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। प्रदेश में अब तक कुल 630 वृहद गो संरक्षण केन्द्रों की स्वीकृति प्रदान की गयी है तथा 518 केन्द्रों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। प्रत्येक केन्द्र की इकाई निर्माण लागत 160.12 लाख है। वृहद गो संरक्षण केन्द्र के निर्माण पर कुल रू. 8311.78 करोड अवमुक्त किया गया है। प्रत्येक वृहद गो संरक्षण केन्द्र की गोवंश धारण क्षमता लगभग 400 गोवंश की है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में वृहद गो संरक्षण केन्द्रों के निर्माण हेतु धनराशि रू. 10000.00 लाख (एक अरब मात्र) प्राविधानित है, जिसके सापेक्ष 46 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यह धनराशि शीघ्र ही अवमुक्त कर दी जायेगी।
इन वृहद गो संरक्षण केन्द्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, जिनमें पर्याप्त भूसा भंडारण, हरा चारा उत्पादन, स्वच्छ पेयजल तथा पशु चिकित्सा सेवाएं जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इससे एक ओर
जहां पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। प्रदेश के वृहद गो संरक्षण केन्द्रों तथा अन्य गो आश्रय स्थलों के संचालन में एनजीओ/एफपीओ/स्वयं सहायता समूहों एवं कारपोरेट फर्माें की भी भागीदारी सुनिश्चित करायी जा रही है। गो संरक्षण कार्यों में स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाएगा । गौसंरक्षण केंद्रों के निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा ।
जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा की कि वे इन वृहद गो संरक्षण केन्द्रों के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करेगा । गो संरक्षण के इस अभियान में सहयोग प्रदान करेग।
पशुपालन विभाग द्वारा गो आश्रय स्थलों को स्वावलम्बी बनाने हेतु बहुआयामी प्रयोग किये जा रहे हैं। गाय के गोबर से गो दीप, धूपबत्ती, गोलॉग, गोबर के गमले, वर्मी कम्पोस्ट तथा सी0बी0जी0 उत्पादन इकाईयोें की स्थापना की जा रही है। इन इकाईयों के संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा महत्वपूर्ण योगदान किया जा रहा है।