[25/07, 7:32 pm] kaushalparashari12234: बेवजह पत्रकारों को हिरासत में लेना पड़ा भारी, एसओजी प्रभारी लाइन हाजिर
पत्रकारों ने कहा—यह संघर्ष की पहली जीत, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की उठी मांग
शाहजहाँपुर, ग्रामीण भारत खबरें । पत्रकारों को कथित रूप से बिना पर्याप्त आधार के हिरासत में लेने के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एसओजी प्रभारी श्यामवीर सिंह को लाइन हाजिर कर दिया है। पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने पूरे प्रकरण की जांच के भी आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग के बाद की गई। आपको बता दें 23 जुलाई की शाम अपने घर जा रहे पत्रकार प्रभाकर मिश्रा और विवेक मिश्रा को एसओजी टीम द्वारा कथित रूप से हिरासत में लिए जाने की घटना के बाद जिलेभर के पत्रकारों में आक्रोश फैल गया था। घटना के विरोध में 24 जुलाई को विभिन्न पत्रकार संगठनों ने मतभेद भुलाकर एकजुटता दिखाई और करीब तीन किलोमीटर लंबा विरोध मार्च निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। पत्रकारों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
विरोध के दौरान पत्रकारों ने पुलिस विभाग के आधिकारिक मीडिया ग्रुप से खुद को अलग कर नाराजगी जताई और पुलिस से संबंधित खबरों के बहिष्कार का भी निर्णय लिया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारों से वार्ता कर मामले की जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इसी क्रम में एसओजी प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया।
पत्रकार संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे संघर्ष की पहली जीत बताया है।
उनका कहना है कि केवल लाइन हाजिर करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका भी तय की जानी चाहिए तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।पत्रकारों का कहना है कि भविष्य में भी पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर वे एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहेंगे। उनका मानना है कि यह कार्रवाई पत्रकारों की एकता और शांतिपूर्ण विरोध का परिणाम है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पत्रकारों ने पुलिस-प्रशासन और मीडिया के बीच संवाद की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि लंबे समय से पुलिस अधीक्षक द्वारा महत्वपूर्ण घटनाओं पर स्वयं मीडिया को आधिकारिक बयान नहीं दिया जाता, जबकि अधिकांश मामलों में अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से ही जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। पत्रकारों का आरोप है कि घटना की जानकारी लेने के दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा अभद्र व्यवहार भी किया गया।
हालांकि, पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने पत्रकारों से संवाद स्थापित करते हुए भविष्य में बेहतर समन्वय बनाए रखने और हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया है। पत्रकारों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। #
[25/07, 7:33 pm] kaushalparashari12234: बेवजह पत्रकारों को हिरासत में लेना पड़ा भारी, एसओजी प्रभारी लाइन हाजिर
पत्रकारों ने कहा—यह संघर्ष की पहली जीत, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की उठी मांग
शाहजहाँपुर, पत्रकारों को कथित रूप से बिना पर्याप्त आधार के हिरासत में लेने के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एसओजी प्रभारी श्यामवीर सिंह को लाइन हाजिर कर दिया है। पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने पूरे प्रकरण की जांच के भी आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग के बाद की गई। आपको बता दें 23 जुलाई की शाम अपने घर जा रहे पत्रकार प्रभाकर मिश्रा और विवेक मिश्रा को एसओजी टीम द्वारा कथित रूप से हिरासत में लिए जाने की घटना के बाद जिलेभर के पत्रकारों में आक्रोश फैल गया था। घटना के विरोध में 24 जुलाई को विभिन्न पत्रकार संगठनों ने मतभेद भुलाकर एकजुटता दिखाई और करीब तीन किलोमीटर लंबा विरोध मार्च निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। पत्रकारों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
विरोध के दौरान पत्रकारों ने पुलिस विभाग के आधिकारिक मीडिया ग्रुप से खुद को अलग कर नाराजगी जताई और पुलिस से संबंधित खबरों के बहिष्कार का भी निर्णय लिया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारों से वार्ता कर मामले की जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इसी क्रम में एसओजी प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया।
पत्रकार संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे संघर्ष की पहली जीत बताया है। उनका कहना है कि केवल लाइन हाजिर करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका भी तय की जानी चाहिए तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।पत्रकारों का कहना है कि भविष्य में भी पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर वे एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहेंगे। उनका मानना है कि यह कार्रवाई पत्रकारों की एकता और शांतिपूर्ण विरोध का परिणाम है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पत्रकारों ने पुलिस-प्रशासन और मीडिया के बीच संवाद की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि लंबे समय से पुलिस अधीक्षक द्वारा महत्वपूर्ण घटनाओं पर स्वयं मीडिया को आधिकारिक बयान नहीं दिया जाता, जबकि अधिकांश मामलों में अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से ही जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। पत्रकारों का आरोप है कि घटना की जानकारी लेने के दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा अभद्र व्यवहार भी किया गया।
हालांकि, पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने पत्रकारों से संवाद स्थापित करते हुए भविष्य में बेहतर समन्वय बनाए रखने और हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया है। पत्रकारों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।