आईएएस की लाल-बत्ती वाली कुर्सी छोड़कर जनता की आवाज बनने मैदान में उतरीं दिव्या मित्तल, उत्तर प्रदेश से नई राजनीति का आगाज कर पुराने निजाम के खिलाफ खोला मोर्चा!

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आईएएस की लाल-बत्ती वाली कुर्सी छोड़कर जनता की आवाज बनने मैदान में उतरीं दिव्या मित्तल, उत्तर प्रदेश से नई राजनीति का आगाज कर पुराने निजाम के खिलाफ खोला मोर्चा!

Wednesday, September 30, 2026 | September 30, 2026 Last Updated 2026-09-30T07:44:03Z
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आईएएस की लाल-बत्ती वाली कुर्सी छोड़कर जनता की आवाज बनने मैदान में उतरीं दिव्या मित्तल, उत्तर प्रदेश से नई राजनीति का आगाज कर पुराने निजाम के खिलाफ खोला मोर्चा!  
संवाददाता कौशल पाराशरी यूपी हेड 
उत्तर प्रदेश कैडर की तेज-तर्रार और चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद आखिरकार अपने अगले कदम का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। संतकबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया जैसे जनपदों में बतौर जिलाधिकारी (डीएम) अपनी जनहितकारी कार्यशैली से पहचान बनाने वाली दिव्या मित्तल ने पिछले महीने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी थी। देवरिया के डीएम पद से हटाकर राजस्व परिषद में सचिव बनाए जाने के बाद से ही उनके राजनीति में उतरने की अटकलें लगाई जा रही थीं। मंगलवार की सुबह उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत वीडियो संदेश जारी कर लोगों के मन में उठ रहे तमाम सवालों—आगे क्या, किसके साथ और कहां से—का खुलकर जवाब दिया।  

'आगे क्या' का जवाब देते हुए दिव्या मित्तल ने साफ ऐलान किया कि वह अब राजनीति के मैदान में उतर रही हैं। उन्होंने कहा कि समाज और सरकार में सब कुछ हासिल करने के बाद अब वह उन आम और वंचित लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी फरियाद किसी सरकारी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाए तो अनसुनी कर दी जाती है। उन्होंने देश की आजादी के 80 सालों की व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उन्हें इस व्यवस्था से हिसाब चाहिए। अपने प्रशासनिक कार्यकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने मिर्जापुर के लहुरियादह का उदाहरण दिया, जहां एक गरीब महिला के आग्रह पर उन्होंने स्कूल स्वीकृत किया था, लेकिन तीन साल बाद भी वह नहीं बन सका। इसके अलावा उन्होंने पन्नी में दरखास्त लपेटकर घूमने वाले भूमिहीन गरीबों की जमीन पर कब्जा न मिलने, 'ऊपर से मनाही' के नाम पर न्याय रोकने, सड़कों के गड्ढों में जान गंवाते राहगीरों, पेपर लीक से बर्बाद होते युवाओं और एआई (AI) के दौर में बच्चों के भविष्य को लेकर नीति-निर्माताओं की अनदेखी पर कड़े प्रहार किए।  

'किसके साथ' राजनीति करेंगी, इस पर दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी राजनीतिक दल या झंडे के नीचे जाकर राजनीति नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि जो व्यवस्था का हिस्सा बन जाता है, वह व्यवस्था से हिसाब नहीं मांग सकता; इसलिए वह सीधे आम जनता, किसानों, मजदूरों, डॉक्टरों, वकीलों, छात्रों और अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करने वाली माताओं के साथ मिलकर मंच तैयार करेंगी। इस्तीफे के बाद राहुल गांधी से मुलाकात की चर्चाओं और एक बड़ी पार्टी के प्रवक्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को डराने की कोशिशें अब नहीं चलेंगी और वह किसी से डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने बाहुबल, काले धन और जाति-धर्म के गठजोड़ की राजनीति को नकारते हुए जनता को सीधे अपने अभियान से जोड़ने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर (91-98-956-957) भी जारी किया।  

'कहां से' के सवाल पर उन्होंने गर्व से कहा कि उत्तर प्रदेश की मिट्टी ही उनकी कर्मभूमि है और इस बदलाव की शुरुआत भी उत्तर प्रदेश से ही होगी। देवरिया में चलाए गए 'ऑपरेशन कब्जा मुक्ति' का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब नेक इरादे से काम हो, तो जनता खुद आगे बढ़कर सहयोग करती है। उन्होंने कहा कि 80 सालों से मसीहा का इंतजार करने के बजाय जनता को अब खुद अपनी ताकत पहचाननी होगी। उनका मकसद केवल चेहरे बदलना नहीं, बल्कि राजनीति की सोच, इरादे और फिक्र को बदलना है ताकि भविष्य में किसी गरीब को सरकारी दफ्तर में अपने हक और न्याय के लिए किसी सिफारिश या फोन कॉल का मोहताज न होना पड़े।
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