संवाददाता दुष्यंत सिंह मैनेजिंग एडिटर
करनपुर में शिवभक्ति की गूंज, चौथे दिन रुद्राक्ष महिमा और नारद मोह प्रसंग ने बांधा समां
बदायूं करनपुर में आयोजित नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास महामंडलेश्वर अमृत दास खाकी जी महाराज के मुखारबिंद से भगवान शिव की महिमा, रुद्राक्ष धारण की महत्ता और भक्ति के विभिन्न स्वरूपों का ऐसा आध्यात्मिक वर्णन हुआ कि कथा पंडाल हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयघोष से गूंज उठा।
रुद्राक्ष केवल माला नहीं, शिवभक्ति का प्रतीक
महाराज जी ने कथा के दौरान रुद्राक्ष धारण करने की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में रुद्राक्ष को भगवान शिव से जुड़ा पवित्र प्रतीक माना गया है। रुद्राक्ष के दर्शन और धारण की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं को शिवभक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना में “ॐ नमः शिवाय” सबसे सरल और प्रभावशाली पंचाक्षरी मंत्रों में से एक है। श्रद्धा और विश्वास के साथ शिव नाम का स्मरण मनुष्य को आध्यात्मिक शांति की ओर ले जाता है।
श्रवण, कीर्तन और मनन से भक्ति की ओर बढ़ता है मनुष्य
कथा व्यास ने भक्ति के स्वरूपों पर प्रकाश डालते हुए श्रवण, कीर्तन और मनन को प्रभु भक्ति एवं आध्यात्मिक प्राप्ति के महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा को केवल सुनने तक सीमित न रखने, बल्कि उसके संदेश को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
नारद मोह और भगवान शिव से जुड़े प्रसंगों ने बांधा समां
चौथे दिन कथा में नारद मोह प्रसंग सहित भगवान शिव और भगवान विष्णु से जुड़े पौराणिक प्रसंगों का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। प्रसंगों के माध्यम से महाराज जी ने अहंकार, मोह और सांसारिक आकर्षण से ऊपर उठकर ईश्वर की शरण में जाने का संदेश दिया।
कथा के दौरान श्रद्धालु देर तक मंत्रमुग्ध होकर धार्मिक प्रसंगों का श्रवण करते रहे। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ और वातावरण में गूंजता “हर-हर महादेव” का जयघोष करनपुर की धरती को पूरी तरह शिवमय करता नजर आया...