बेसिक स्कूल अफजलपुर बुधेती मैं हुआ शिष्टाचार 4 क्या हुआ व्यवहार।
सहसवान कोतवाली क्षेत्र सहसवान के विकास क्षेत्र दहगवां के उच्च प्राथमिक विद्यालय अफजलपुर बुधेती के इंचार्ज प्रधानाध्यापक राजीव भटनागर के नेतृत्व में अजीत,साधना,पूजा,गायत्री यज्ञ
कमलेश और विवेक ने सूखे कचरे, गीले कचरे, जैविक और अजैविक कचरे का वर्गीकरण करके कचरे का प्रबंधन करना सीखा। संसाधनों का उपयोग एवम उसका प्रबर्धन किस प्रकार किया जाए यह भी जाना।
किसी भी कचरे को सही तरह से निपटाने के लिए उसे संग्रह, परिवहन, निगरानी और उस पर कुछ खास प्रक्रिया करनी पड़ती है।
उसे ही कचरा प्रबंधन या अपशिष्ट प्रबंधन कहते है।
कचरा प्रबंधन दुनिया भर के शिक्षाविदों के लिए कचरे के निपटान के लिए नई तकनीकों का आविष्कार और खोज करने के लिए अग्रणी अध्ययनों में से एक बन गया है।
वैज्ञानिक और इंजीनियर ऐसे बैक्टीरिया और वायरस बनाने की कगार पर हैं जो प्लास्टिक को विघटित कर सकते हैं लेकिन अभी तक पृथ्वी से प्लास्टिक को खत्म करने का कोई वैज्ञानिक उपाय नहीं है।
सब्जियों और फलों जैसे जैविक कचरे को खाद, लैंडफिल या किसी अन्य रूप में विघटित किया जा सकता है। लेकिन इन सामग्रियों के आविष्कार के बाद से ही मानव सभ्यता के लिए अकार्बनिक कचरे और प्लास्टिक कचरे का निपटान एक चुनौती रही है।
यह कचरा मानव और प्रकृति के दैनिक कामकाज से उत्पन्न होता है। अगर इस कचरे को सही तरह से प्रबंधन ना किया जाए तो यह पूरी दुनिया के लिए खतरा है।
कचरे के बारे में हमारी समझ पर्याप्त न होने के कारण आज हमारी पृथ्वी व पर्यावरण पर बेहद विनाशकारी प्रभाव हो रहे है इन सभी प्रश्नों के उत्तर देने पर हमें कचरे के बारे में न केवल सीखने में मदद मिलेगी
बल्कि उसे कैसे संभालना है यह भी समझ आएगी। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चे सहजता से कचरे के विभिन्न पहलुओं को सीखेंगे
और ज्ञान को स्थायी करेंगे। सभी छात्र पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होकर समाज को भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देंगे। ताकि पर्यावरण और नीला ग्रह कहा जाने वाला एक अनोखा ग्रह पृथ्वी स्वच्छ और साफ रहे।