बदायूं 24 मई प्रदेश सरकार भी चली प्राईवेट स्कूलों की राह,सरकार ने माध्यमिक विद्यालय में छुट्टियों में समर कैम्प

Notification

×

All labels

All Category

All labels

बदायूं 24 मई प्रदेश सरकार भी चली प्राईवेट स्कूलों की राह,सरकार ने माध्यमिक विद्यालय में छुट्टियों में समर कैम्प

Friday, May 24, 2024 | May 24, 2024 Last Updated 2024-05-24T07:55:54Z
    Share
बदायूं 24 मई प्रदेश सरकार भी चली प्राईवेट स्कूलों की राह,
सरकार ने माध्यमिक विद्यालय में छुट्टियों में समर कैम्प


के आयोजन को लेकर शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। हालांकि, विभाग ने इसे लेकर आदेश जारी कर दिए हैं
उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में 20 मई से गर्मी की


 छुट्टियां हो चुकी है। हालांकि विभाग ने जून के पहले सप्ताह में पर्यावरण दिवस पर छुट्टियों के दौरान स्कूलों में समर कैंप आयोजित कराने के निर्देश दिए हैं। एक सप्ताह के इस कैंप में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी


गतिविधियों के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। वहीं शिक्षकों में भीषण गर्मी के दौरान विद्यालय खोले जाने को लेकर नाराजगी है।
शिक्षा विभाग के अनुसार विद्यालयों में गठित ईको क्लब के माध्यम से एनईपी के तहत पर्यावरण जागरूकता,

जल संरक्षण, सफाई व स्वास्थ्य आदि कौशल विकास के लिए समर कैंप आयोजित किए जाएं। पांच जून को विद्यार्थियों को प्राकृतिक व पर्यटन स्थलों का भ्रमण, पौधरोपण कर जागरूक करना होगा। छह जून को विद्यालय के किचन गार्डेन में विद्यार्थियों को शामिल करने,


पुरानी बाल्टी, बोतल में पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कहा गया है सात जून को ई-कचरा इकट्ठा करने का अभियान और विद्यालय पर बूथ स्थापित कर विद्यार्थियों को इसके लिए जागरूक करें। आठ जून को स्वच्छता अभियान चलाएं।


 महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने कहा है कि इसी तरह नौ जून को ऊर्जा बचाने, दस जून को पानी बचाने, 11 जून को सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग न करने के लिए जागरूक करना है। उन्होंने सभी डीआईओएस को इसके अनुसार कार्यक्रम आयोजित करने को कहा है।

वहीं उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने 21 मई से 30 जून को गर्मी की छुट्टियों में कार्यक्रम निर्धारित करने पर नाराजगी जताई है।


कहा कि इस भीषण गर्मी में छात्रों को टूर या गतिविधियां कराना संभव नहीं है। वहीं शिक्षक अपने परिवार सहित बाहर जाने के लिए ट्रेन होटल तक की बुकिंग करा चुके हैं। शिक्षा विभाग को अपने इस निर्णय पर एक बार विचार करना चाहिए।
CLOSE ADS
CLOSE ADS
close