बदायूं /उत्तर प्रदेश बदायूँ हिन्दी काव्य मंच,बदायूँ के द्वारा महर्षि बाल्मीकि की जयंती के शुभ अवसर पर एक विराट कवि सम्मेलन का आयोजन स्काउट भवन बदायूँ में आयोजित
किया गया, आयोजक सुनील शर्मा समर्थ, संयोजक शैलेन्द्र मिश्र देव तथा संरक्षक श्री संजीव वार्ष्णेय रहे।
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता द्वारा किया गया।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता बरेली के उस्ताद शायर विनय सागर जायसवाल द्वारा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ सत्यवती सिंह सत्या की सरस्वती वंदना द्वारा हुआ।
युवा कवि सुब्रत द्विवेदी ने पढ़ा
इस पल पल घटते जीवन से
जीने से उचटती इस मन से
राम कुमार अफ़रोज़ ने पढ़ा
चैटिंग को अंतर्मन का प्यार समझ बैठी,
छल करने वाले को दिलदार समझ बैठी।
शैलेन्द्र मिश्र देव ने पढ़ा
आदि कवि बाल्मीकि का ही तो काम है,
आज जन जन के आराध्य श्री राम हैं।
सत्यवती जी पढ़ा
आपने मुझे पुकारा न होता,
तो मैने ये दामन संवारा न होता।
रिठौरा से आए राजेश शर्मा पढ़ा
करे तन मन को जो पवन वो गंगा जल बना देना,
बुझा दे प्यास धरती की वही बदल बना देना।
अलीगढ़ से आए अभय सिंह अभय ने पढ़ा
हैं बनाई आज सबने दूरियां
हँस रहे सब देख कर मजबूरियां।
एटा से आए कृष्ण मुरारी लाल मानव ने पढ़ा
शमां पर जल के मर जाए उसे परवाना कहते हैं,
जो समझाने पर न समझे उसे अनजाना कहते हैं।
संजीव वार्ष्णेय हाथरस ने पढ़ा
वो ही श्याम महाभारत में,अर्जुन के बाण में।
वो ही श्याम केशव हैं, गीता के ज्ञान में।।
बदायूँ के उस्ताद शायर अहमद अमज़दी ने कुछ यों पढ़ा
मौजे तूफ़ाॅं से जो डर जाते हैं लोग
वो किनारे पर ही मर जाते हैं लोग
आप जाऐं शौक़ से जाएं उधर
हम नहीं जाते जिधर जाते हैं लोग
अहमद अमजदी बदायूॉंनी
इसके अतिरिक्त महेश यादव संघर्षी, आतिश सोलंकी, कामेश पाठक, आकाश पाठक, उज्ज्वल वशिष्ठ, भुवनेश चिंतन जी ने काव्य पाठ किया।
कार्यक्रम देर रात तक चला।
इस अवसर पर अरुण यादव, पुष्पेंद्र शर्मा, अमन मयंक शर्मा, आदि उपस्थित रहे।
सफल संचालन दहेमी से आए सुनील शर्मा समर्थ ने किया।
अंत में अध्यक्ष विनय सागर जायसवाल ने अपने काव्य पाठ के उपरांत सभी का आभार प्रकट किया।