भागवत कथा का श्रवण करना ही भवसागर रुपी संसार से मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय- पंडित पंकज बमौला।

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भागवत कथा का श्रवण करना ही भवसागर रुपी संसार से मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय- पंडित पंकज बमौला।

Monday, January 19, 2026 | January 19, 2026 Last Updated 2026-01-19T15:35:39Z
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भागवत कथा का श्रवण करना ही भवसागर रुपी संसार से मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय- पंडित पंकज बमौला।

संवाददाता विनय अग्रवाल की रिपोर्ट। फतेहगंज पूर्वी। 

प्राचीन बाग वाले मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन शुखदेव एवं राजा परीक्षित संवाद का हुआ वर्णन। नगर के प्राचीन शिवालय में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन उत्तराखंड के बद्रीनाथ से आए पंडित पंकज बमौला जी ने अपने श्री मुख से श्रीमद् भागवत कथा में सुखदेव एवं राजा परीक्षित के प्रसंग का वर्णन बहुत ही सुंदर ढंग से वर्णन किया

 जब राजा परीक्षित को श्राप मिला तो वह सुखदेव जी के पास पहुंचे तो सुखदेव जी ने उन्हें श्रीमद् भागवत कथा के महत्व के बारे में बताया श्रीमद् भागवत की कथा 7 दिन सुनने के बाद राजा परीक्षित का इस संसार रूपी माया से मोह भंग हो गया

 और वह परमधाम को प्राप्ति करने का यत्न करने लगे पंडित पंकज बमौला ने बताया कि इस संसार रूपी भवसागर से पर पाने का सिर्फ एक ही उपाय है वह श्री भगवान हरि के नाम का संकीर्तन एवं श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करना क्योंकि श्रीमद् भागवत कथा स्वयं भगवान योगेश्वर श्री कृष्ण की

 प्रतिमूर्ति है इस दौरान नगर के अलावा क्षेत्र के श्रद्धालु काफी संख्या में उपस्थित रहे वहीं मंदिर के प्रबंधक एवं मुख्य यजमान अनिल कुमार गुप्ता रजनीश कुमार गुप्ता अरविंद कुमार गुप्ता एवं चंद्रशेखर गुप्ता के द्वारा भगवान ठाकुर श्री हरि की आरती उतारी गई इस दौरान 

राधा रानी और श्री कृष्णा के भजनों पर श्रद्धालु घूमने और नाचने लगी कथा के विश्राम पर समस्त से लोंगो को प्रसाद वितरण किया गया यहां बता दें कि नगर में के रामलीला मैदान में स्थित बाग वाला मंदिर काफी प्राचीन है इस मंदिर का काफी समय बाद पुनर्निर्माण कराया गया है

 इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग कई हजार वर्ष पुराना है जो एक दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य अजय मिश्रा ने बताया कि इस मंदिर में एक बहुत पुराना नाग नागिन का जोड़ा रहता है जो की अर्ध रात्रि के बाद भगवान शिव शंकर का दर्शन करने आता है 

कई बार लोगों ने देखा की अर्धरात्रि के समय नाग नागिन का जोड़ा भगवान शंकर की शिवलिंग पर बैठा हुआ है यहां बता दे कि यह मंदिर नगर के अलावा समस्त क्षेत्र में एक बहुत ही पौराणिक महत्व रखता है नगर में इस मंदिर की काफी मानता है वही नगर के लोगों का कहना है यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है।
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